नाभि पीड़ासन के फायदे, कैसे करें एवं अन्य जानकारियां: Nabhi Pidasana Benefits in Hindi

नाभि पीड़ासान एक संस्कृत भाषा का शब्द हैं । नाभि पीड़ासन तीन शब्दों से मिलकर बना है। ” नाभि ” का अर्थ पेट पर एक गहरा निशान होती हैं, जो नवजात शिशु से गर्भनाल को अलग करने के कारण बनती है तथा  “पीड “का अर्थ दबाव डालना होता है और “आसान  ” जिसका अर्थ होता है  “मुद्रा “।

जीवन का आधार ही स्वास्थ्य पर निर्भर है ।सांस लेना जिंदा रहने की स्वाभाविक प्रक्रिया है। गहरी लंबी श्वास ही ज्यादा से ज्यादा रक्त में मिलकर मस्तिष्क को ऊर्जा प्रदान करती है और फेफड़ों की कार्य क्षमता को बढ़ाने में एवं फेफड़ों में जमा विषैला पदार्थ बाहर निकालने में मदद मिलती हैं।फेफड़ों में ऑक्सीजन की अधिक मात्रा से एकाग्रता , धैर्य , मेरुदंड में लचीलापन क्षमता में बढ़ोतरी होकर शरीर को ऊर्जावान प्रदान करता है कॉविड-19 महामारी में सबसे ज्यादा अटैक हमारे फेफड़ों तथा गले पर हो रहा था। स्वस्थ रहने के लिए सुरक्षा कवच के रूप में मास्क का उपयोग बहुत जरूरी होने के साथ- साथ नियमित योग प्राणायाम बहुत आवश्यक है .

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  1. इस आसन ( Nabhi Pidasana ) के अभ्यास से नितंब, घुटनों, टखनों की संधियों में अच्छा खिंचाव लाता है और नितंब ,घुटनों ,टखनों की संधियों को लचीला बनाता है ।
  2. इस आसन के नियमित अभ्यास से नितंब व पैरों की मांसपेशियों में खिंचाव लाता है जिससे मांसपेशियों का कड़ापन दूर होता है।
  3. हाथ व पैरों को बल मिलता है।
  4. यह आसन कब्ज या अपच जैसी पेट से जुड़ी अनेक समस्याओं को दूर करता है।
  5. यह आसन ( Nabhi Pidasana) मस्तिष्क के तनाव को मुक्त करता है और हमारे शरीर को धैर्य और लचीलापन प्रदान करता है ।
  6. यह उदर – क्षेत्र के आंतरिक अंगों की शिथिलता को दूर करता है उदर- क्षेत्र के अवयव को सक्रिय करता है तथा पाचन तंत्र(Digestive system) में सुधार लाता है।
  7. शरीर में गैस को कम करता है ।
  8. इस आसन का नियमित अभ्यास करने से हमारे पैरों की मांसपेशियां मजबूत होती हैं ।
  9. इस योगासन से कमर और फाइल की मालिश हो जाती है ।

1. सर्वप्रथम अपने आसन पर शांत मन से बैठ जाएं।

2. अब अपने दोनों पैरों को सामने की तरफ सीधा फैला लें ।

3. बध्द  कोणसन के समान ही अपने दोनों पैरों को घुटनों से मोड कर पैरों के पंजों को आपस में मिला ले ।

4. अपने दोनों हाथों से दोनों पंजों को पकड़े और उनको अंदर की तरफ खींचते हुए नाभि के पास ले जाएं ।

5.  क्योंकि इस आसन के अभ्यास के दौरान घुटने ऊपर उठ जाएंगे अतः पूरा  भार नितंब पर आ जाएगा इसलिए संतुलन बनाने की कोशिश करते हुए अपनी क्षमता के अनुसार इस आसन को करें ।

श्वास के क्रम अनुसार

6. इस आसन के अभ्यास के दौरान पैरों को ऊपर उठाते समय अंत:कुंभक करें।

7.  वापस मूल स्थिति में आते समय पुनः आकलन करें और 4 से  5 बार फिर यथाशक्ति करें ।

समय का ध्यान रखें –

इस आसन का अभ्यास 4 से 5 बार अपनी क्षमता के अनुसार करें ।

1) यह उच्च स्तर के अभ्यास है इसलिए इस आसन का अभ्यास करते समय विशेष सावधानी रखें जिनके घुटनों  टखनों और पैरों के जोड़ों में लचीलापन और मजबूती हो वह ही इस आसन का अभ्यास करें ।

2) स्लिप डिस्क घुटनों के जोड़ों के रोगी इस आसन का अभ्यास करने से बचें।

3) नाभि पीड़ासन का अभ्यास सुबह  या शाम को खाली पेट ही करें ।

4) साइटिका, कमर दर्द या घुटनों के दर्द से पीड़ित लोगों को इस आसन को करने से बचना चाहिए ।

5) इस आसन का अभ्यास किसी योग शिक्षक की देखरेख में करना अनिवार्य होता है ।


नाभि पीड़ासन(Nabhi Pidasana)  एक बेहतरीन  आसान है जिसके अनेक लाभ ( Benefits of Nabhi Pidasana) हैं। इसके अभ्यास से बहुत से शरीर को लाभ होते हैं , कब्ज या अपच जैसी पेट से जुड़ी अनेक समस्याओं  से लेकर अन्य तमाम गंभीर बीमारियों को कम करने में नाभि पीड़ासन का अभ्यास काफी लाभदायक ( Nabhi Pidasana Benefits) साबित होता है ।

हमें आशा है कि आपको यह लेख नाभि पीड़ासन के फायदे (Nabhi pidasana Benefits in Hindi) पसंद आई होगी । इस लेख में हमने नाभि पीड़ासन क्या है (Nabhi Pidasana in Hindi) ,नाभि  पीड़ासन के फायदे  ( Nabhi Pidasana Benefits) , नाभि पीड़ासन कैसे करें । ( Nabhi Pidasana Steps ) और सावधानियां के बारे में जाना है ।अगर आपको किसी भी प्रकार का सवाल पूछना हो या राय देनी हो तो नीचे कमेंट बॉक्स में लिख सकते हैं। हमसे जुड़ने के लिए हमारे सोशल मीडिया पेज को आप फॉलो कर सकते हैं ।

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