कमर दर्द होगा छूमंतर जाने सबसे आसान तरीका :5 Health Benefits of Supine Twist in Hindi

5 Health Benefits of Supine Twist: सुप्त मत्स्येंद्रासन आसन एक सरल आसन है। यह आसन जितना सरल आसन है उतना ही उपयोगी आसन है। इसको कोई भी आसानी से कर सकता है। इस आसन को फर्श पर पीठ के बल लेटकर किया जाता है। यह आसन तनाव को . अपने दिनचर्या में सुप्त मत्स्येंद्रासन ( Supta Matsyendrasana ) को जरूर शामिल करना चाहिए यह ( 5 Health Benefits of Supine Twist ) हमारी आंतरिक  अंगों की मालिश करके उन्हें विषाक्त पदार्थ से मुक्त करवाता है और पाचन तंत्र को  उत्तेजित करके कब्ज जैसी समस्याओं को कम करने में मदद करता है।

सुप्त मत्स्येंद्रासन क्या है  ( Supta Matsyendrasana Meaning in Hindi )

सुप्त मत्स्येंद्रासन संस्कृत के शब्दों से लिया गया है जो तीन शब्दों के मिलने से बना है । सुप्त, मत्स्येंद्र , आसन । जिसका अर्थ है  सुप्त मतलब लेटना , मत्स्येंद्र मतलब मछलियों के भगवान और आसन का मतलब मुद्रा या स्थिति से लिया जाता है। सुप्त मत्स्येंद्रासन को एक और नाम से भी जाना जाता है  सुपाइन ट्विस्ट, द रिसाइक्लिंग ट्विस्ट, द रिसाइक्लिंग लार्ड ऑफ द फिश पोज़ और द जथारा परिवर्तनासना भी कहा जाता है। इस आसन को हलासन  भुजंगासन (Bhujangasan) सर्वांगासन का पूरक माना जाता है। इस आसन  को करने से हमारे कमर में होने वाले दर्द , पीठ के निचले हिस्से में दर्द और कंधों की जकड़न में रामबाण का उपाय सुप्त मत्स्येंद्रासन करता है.

सुत मत्स्येंद्रासन के फायदे : 5 Health Benefits of Supine Twist

वैसे तो सभी आसन अपने आप में एक अहम भूमिका निभाते हैं लेकिन सुप्त मत्स्येंद्रासन हमारे बैक पोज और कंधों की जकड़न में एक अहम भूमिका निभाता है। इस योगासन को करने से हमारे शरीर को कई तरीके से ( 5 Health Benefits of Supine Twist ) लाभ मिलते हैं जो इस प्रकार से हैं –

1)  कमर दर्द में लाभ  :–  कमर दर्द महिलाओं की आम समस्या बनी हुई है लेकिन आज के समय में पुरुष भी दिन भर ऑफिस वर्क कुर्सी पर बैठकर करते-करते उन्हें भी कमर दर्द की समस्या होने लगी है। अगर हम अपनी इस कमर दर्द यातना से छुटकारा पाना चाहते हैं तो हमें अपने नियमित दिनचर्या में सुप्त मत्स्येंद्रासन ( Supta Matsyendrasan ) आसान को  शामिल करना चाहिए जो हमारे शरीर के अंदर विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालने में मदद करता हैं। ( 5 Health Benefits of Supine Twist ) पाचन अंगों का मालिश करता है और पेट की मांसपेशियों को मजबूत करने का काम करता है जिससे कमर टोन हो जाता है ।

2)  लचीलापन को बढ़ावा मिलता है  :–  अगर आपके कंधे , कमर और कुल्हों में  अक्सर जकड़न हो जाता है तो इन हिस्सों को घुमाना और मोड़ना काफी चुनौतीपूर्ण लगता है । इस चुनौती से छुटकारा पाने के लिए हमें अपने दैनिक रूटीन में सुपाइन स्पाइनल ट्विस्ट पोज़ को अवश्य शामिल करना चाहिए। हमारे शरीर के जिन हिस्सों में जकड़न होता है वहां सुधार करके हड्डियों और मांसपेशियों के लचीलेपन को बढ़ावा मिलता है।

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3 )  रक्त परिसंचरण को बढ़ावा देना :– सुप्त मत्स्येंद्रासन ( 5 Health Benefits of Supine Twist ) करने से पूरे शरीर में रक्त प्रवाह को बेहतर बनाने में मदद मिलती है और यह आसन मांसपेशियों में खिंचाव लाता है ।

4 ) पीठ दर्द से राहत मिलता है  :–  पीठ दर्द से राहत पाने के लिए सुप्त मत्स्येंद्रासन अवश्य करना चाहिए। यह आसन पीठ और नितंब की मांसपेशियों में खिंचाव लाता है। रीढ़ की हड्डी को लंबा करता है और पीठ को आराम देता है । यह पीठ के ऊपरी हिस्से के दर्द, गर्दन  के दर्द को कम करने में काफी मददगार आसन है  अगर आप कुर्सी पर बैठकर काम करते हैं या फिर जिन महिलाओं को पीठ के निचले हिस्से में दर्द बना रहता है तो आपकी दिनचर्या के लिए सुप्त मत्स्येंद्रासन जैसे प्राणायाम निश्चित रूप से आपके लिए ही बना है।

5 )  तनाव को दूर करता है  :– सुप्त मत्स्येंद्रासन(Supta Matsyendrasana) सुपाइन स्पाइनल ट्विस्ट एक ऐसा प्राणायाम है, जो हमारे मन को एकाग्रता की ओर ले जाता है। यह मुद्रा हमारे दिमाग को भी आराम दिलाता है।व्यस्त और थका देने वाली दिनचर्या में आराम करने और तनाव को कम करने के लिए इस ( 5 Health Benefits of Supine Twist ) प्राणायाम को एक बेहतर प्राणायाम बताया गया है। अगर आप तनाव से मुक्त रहते हैं तो आपको नींद भी अच्छी आती है।

सुप्त मत्स्येंद्रासन कैसे करें (Supta Matsyendrasana Steps in Hindi )   :–

सुप्त मत्स्येंद्रासन (Supine Spinal Twist) योग के महत्वपूर्ण आसनों में से एक है जो शरीर को मोड़ने और रीढ़ की हड्डी को लचीला बनाने में मदद करता है। इसे करने की विधि इस प्रकार से है।

1 ) अपनी पीठ के बल लेट जाएँ और अपने पैरों को सीधा रखें।

2 ) अपने दोनों हाथों को कंधों की सीध में फैलाएं और हथेलियों को ऊपर की ओर रखें।

3 ) अपने घुटनों को मोड़ें और पैरों को फर्श पर रखें, इस प्रकार कि आपके पैरों के तलवे फर्श पर सपाट हों।

4 ) धीरे-धीरे अपने दोनों घुटनों को एक साथ रखते हुए दाईं ओर मोड़ें, इस दौरान अपनी गर्दन को बाईं ओर घुमाएं और अपनी बाईं हाथ की ओर देखें।

5) इस स्थिति में कुछ समय तक रहें, और गहरी सांस लें। अपने बाएं हाथ से अपने घुटनों को धीरे से नीचे की ओर धकेल सकते हैं ताकि मोड़ को और गहरा किया जा सके।

6)  धीरे-धीरे अपने घुटनों को वापस केंद्र में लाएं और अपनी गर्दन को भी सीधा करें।

7) अब अपने घुटनों को बाईं ओर मोड़ें और गर्दन को दाईं ओर घुमाएं। इस स्थिति में भी कुछ समय तक रहें और गहरी सांस लें।

8) धीरे-धीरे अपने पैरों को सीधा कर लें और कुछ देर शवासन में लेट कर विश्राम करें।

सुप्त मत्स्येंद्रासन करते समय सावधानियां(Supine Spinal Twist Precautions):

  • इस आसन  को करते समय पीठ या रीढ़ की हड्डी में कोई चोट वाली समस्या हो तो इस आसन को सावधानी पूर्वक करें या फिर किसी विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें ।
  • आसन करते समय कोई असुविधा या दर्द महसूस होने पर इस आसन को तुरंत छोड़ दें ।
  • गर्भवती महिलाओं को इस आसन को करने से बचना चाहिए अगर आपको जरुरी लगे तो विशेषज्ञ की सलाह के बिना ना करें।
  • यदि आपके घुटनों या कूल्हों में चोट हो तो इस आसन को ना करें।

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क्या मत्स्येंद्रासन वजन कम करने में मदद करता है?

हाँ, मत्स्येंद्रासन पेट की चर्बी को कम करने में मदद करता है क्योंकि यह पाचन तंत्र को उत्तेजित करता है और पेट के आसपास के अंगों को मसाज करता है।

बच्चों को मत्स्येंद्रासन कराना कितना सुरक्षित है?

बच्चों को मत्स्येंद्रासन करा सकते हैं, लेकिन इसे सरल और सुरक्षित तरीके से करना चाहिए। बच्चों को अर्ध मत्स्येंद्रासन कराना बेहतर होता है, ताकि उनकी रीढ़ की हड्डी पर ज्यादा दबाव न पड़े।

मत्स्येंद्रासन से किन अंगों को सबसे ज्यादा फायदा होता है?

रीढ़, पेट, लीवर, किडनी और पाचन तंत्र को सबसे ज्यादा फायदा होता है।

मत्स्येंद्रासन करने के लिए क्या किसी विशेष उपकरण की आवश्यकता होती है?

नहीं, इसके लिए किसी विशेष उपकरण की आवश्यकता नहीं होती। एक योगा मैट और आरामदायक कपड़े पर्याप्त होते हैं।

क्या मत्स्येंद्रासन करने से कंधों और गर्दन में तनाव हो सकता है?

यदि सही तरीके से नहीं किया गया तो कंधों और गर्दन में तनाव हो सकता है। रीढ़ को सीधा रखें और ट्विस्ट करते समय कंधों को रिलैक्स रखें।

मत्स्येंद्रासन कब करना चाहिए?

मत्स्येंद्रासन का अभ्यास सुबह के समय खाली पेट करना सबसे अच्छा होता है। अगर सुबह समय न हो, तो शाम को भोजन के 4-6 घंटे बाद भी कर सकते हैं।

मत्स्येंद्रासन करते समय ध्यान कहां रखना चाहिए?

मत्स्येंद्रासन करते समय ध्यान श्वास और ट्विस्ट पर केंद्रित रखें।  इससे मानसिक शांति मिलती है और आसन का भी सही लाभ मिलता है

Conclusion : निष्कर्ष

हमें अपनी दैनिक जीवन को सफल स्वस्थ और सुंदर बनाए रखने के लिए शारीरिक एवं मानसिक रूप से भी स्वस्थ होना जरूरी होता है। जो हम सुप्त मत्स्येंद्रासन (Supta Matsyendrasanan Steps in Hindi) को अपने जीवन में अपना कर एक बेहतरीन प्राणायाम बना सकते हैं। इस प्राणायाम के अनेक लाभ हैं जो हमारे शरीर के अनेक गंभीर बीमारियों से और परेशानियों से छुटकारा दिलाने में हमारी मदद करता है। शारीरिक एवं मानसिक स्वास्थ्य को बढ़ावा देने के लिए सुप्त मत्स्येंद्रासन का अपने आप में एक महत्वपूर्ण योगदान होता है।

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